“तपस कुमार प्रधान: मानवता की मिसाल, पर अब संपत्ति विवाद में असहाय”
Basgora, khejuri ,East Midnapore, 18 April ,2025.
समाज में कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनका जीवन निस्वार्थ सेवा और मानवता का प्रतीक होता है। लेकिन विडंबना यह है कि जीवन के अंतिम पड़ाव में वही लोग उपेक्षा और विवादों के शिकार हो जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है तपस कुमार प्रधान, दिवंगत डॉ. गुणधर प्रधान के सुपुत्र।अपने पिता के अधूरे कार्यों को पूरा करते हुए तपस कुमार ने बहनों की शादी करवाई, संकट की घड़ी में उनके साथ खड़े रहे और हर सुख-दुःख में परिवार और समाज का हाथ थामा।उनकी मानवीय सोच अलग थी। किसी भी सामाजिक या धार्मिक आयोजन—चाहे वह भोग हो, श्राद्ध हो या अन्य अवसर—वे बिना निमंत्रण भी शामिल हो जाते थे, सिर्फ इसलिए कि लोगों के साथ रहना ही उनके लिए महत्वपूर्ण था। करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद उन्होंने कभी विलासिता का रास्ता नहीं चुना। लगभग पचास वर्ष पहले उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में ऑनर्स की पढ़ाई की थी, जो उनकी विद्वत्ता का प्रमाण है।लेकिन आज तस्वीर बिल्कुल बदल चुकी है। उनकी भोली और विश्वास से भरी प्रकृति के कारण उनके निधन के बाद उनकी संपत्ति संकट में है। विडंबना यह है कि वे रिश्तेदार, जो कभी उनके साथ खड़े नहीं हुए, अब उसी संपत्ति पर अधिकार जताने के लिए सामने आ गए हैं। कुछ सच्चे मित्रों के होने के बावजूद, अपने ही रक्त संबंधों के झगड़े ने उन्हें असुरक्षित और असहाय बना दिया है।तपस कुमार प्रधान का जीवन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है—क्या समाज में मानवता और निस्वार्थ सेवा का कोई असली मूल्य है? और क्यों ऐसे लोग, जिन्होंने अपना जीवन दूसरों के लिए समर्पित कर दिया, अंत में इतनी बेबसी झेलते हैं?


